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ठोस कचरा प्रबंधन में भारत में सर्वश्रेष्ठ - छत्तीसगढ़


शासी निकाय के रूप में, पहले, क्षेत्र में उस चरण की पहचान करना आवश्यक हो जाता है जिस पर ठोस-कचरा प्रबंधन के कार्यान्वयन के प्रयास लागू हैं। विश्व स्तर पर, अपशिष्ट प्रबंधन के कई महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) इसके लिए एक 4-भाग के प्रक्रिया को परिभाषित करता है:

  • जिम्मेदारियां और भागीदारी - सार्वजनिक भागीदारी के लिए एक साथ काम करना
  • सक्रिय नीतियां और ठोस निर्णय - एक सहमत, दीर्घकालिक अपशिष्ट और संसाधन प्रबंधन रणनीति, निवेश के लिए एक दीर्घकालिक, स्थिर ढांचा प्रदान करने के लिए आधारिक संरचना
  • मुद्रा प्रबंधन - निवेश के लिए उपयुक्त वित्तपोषण मॉडल और धन के स्रोत का पता लगाएं
  • डेटा क्रांति - शहर के नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का प्रदर्शन, उपलब्ध संकेतकों के आधार पर और सुधार के क्षेत्रों की पहचान

अंबिकापुर लंबे समय से भारत में अपशिष्ट प्रबंधन वाले शहरों में प्रमुख है। लेकिन यह हमेशा से ऐसा नहीं था। 2015 में, शहर कूड़े कचरे में घुट रहा था। सड़कों के किनारे बिखरे हुए कूड़े से लेकर, डस्टबिन में कई दिनों से जमा हुए कचरे तक और जैविक और अजैविक कचरे की सडांध मारता हुआ शहर| बेहतरी के लिए कुछ अच्छा करने की जरूरत थी| अपशिष्ट प्रबंधन के वैश्विक मॉडल में शोध करते हुए मैंने पाया कि इन मुद्दों को हल करने के लिए तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है, जो अंबिकापुर जैसी जगह के लिए सामाजिक और वित्तीय रूप से अव्यवहारिक मॉडल है। हालांकि, ऐसे कई अवयव हैं जिन्हें पुन: डिज़ाइन कर शहर के लिए व्यवहारिक रूप से उपयोग किया जा सकता है|


दूसरे SLRM में, यह स्पष्ट हो गया कि स्वयं सहायता समूहों के लिए यह एक बड़ा अवसर था| अपशिष्ट-से-ऊर्जा जैसे मॉडल इस स्तर पर कार्यान्वयन के लिए बिल्कुल भी संभव नहीं थे पर मैं एक ऐसा मॉडल बनाना चाहता था जो हमारे लिए उपलब्ध संसाधनों से आवश्यकता पूरी करता हो| हमने एक मॉडल बनाया जो विकेंद्रीकृत था और स्रोत पर पृथक्करण पर केंद्रित था। यह मॉडल तकनीकी रूप से सही है, पर्यावरण और आर्थिक रूप से स्थायी और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह पारंपरिक ज्ञान और सामान्य ज्ञान को आकर्षित करता है बजाए उन तरीकों के जो उच्च-लागत कार्यान्वयन तकनीकों पर निर्भर है, महंगे है और अधिक तकनीकी हैं।


जैसा कि किसी भी महान परिवर्तन के साथ होता है, यह केवल नगर निगम द्वारा नहीं किया जा सकता है। जब तक प्रत्येक नागरिक सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में भाग नहीं लेता, तब तक यह मॉडल अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पायेगा। कचरे को डस्टबिन में डालना तो बस एक शुरुआत भर है। लोगों में घरेलू स्तर से गीले और सूखे कचरे में बुनियादी कचरा पृथक्करण की आदत डालने की जरूरत थी। इस प्रकार, मैंने "मिशन क्लीन सिटी" की शुरुआत की - एक केंद्रित पहल, 6 महीने की समय सीमा के साथ। हर एक ड्राइंग, डिजाइन और अनुमान को ध्यान से संकलित किया गया और व्यवस्थित संचालन प्रक्रिया (SOP) अपनाया गया।


हर सुबह, 455 महिलाएं, घर पर पृथक किये हुए अपशिष्ट को इकठ्ठा कर, माध्यमिक पृथक्करण केंद्र ले जाती हैं, जहां इसे 38 अलग अलग वर्गों में बांटा जाता है और कचरे के प्रकार के आधार पर रीसाइक्लिंग, खाद और अन्य प्रसंस्करण के लिए भेजा जाता है| छोटे से छोटे विवरणों पर सावधानीपूर्वक विचार किया गया - सफाई कर्मचारी कई संक्रमणों की चपेट में आ सकते हैं, इसलिए उन्हें उचित परिधान और सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान किए गए थे। महिलाओं द्वार संचालित इस प्रक्रिया के लिए महिलाओं के अनुकूल रिक्शा विकसित किए गए ताकि वे अपने पारंपरिक पहनावे, साड़ी में भी सवारी कर सकें। आत्म-सम्मान भी एक चिंता है जो कई कार्यों और कार्यशैली को प्रभावित करती है। इसलिए हमने महिलाओं की इस टीम का नाम “स्वच्छता दीदी” रखा - जो बहनें हमारे शहर को साफ रखती हैं।


आज, शहर में खुले डंपिंग यार्ड नहीं हैं। अंबिकापुर अपने कचरे के 90% से अधिक को पृथक करता है और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सतत प्रयासों के माध्यम से हर महीने 13 लाख से अधिक की कमाई करता है। इस मॉडल ने राज्य राजकोष पर बोझ डाले बिना सैकड़ों 'ग्रीन रोजगार' पैदा किए हैं। शहरी आजीविका विकास और महिला सशक्तिकरण के लाभ के साथ-साथ इस मॉडल की व्यापक सरलता ने राज्य सरकार को लगभग 150 अन्य शहरों में भी इसे लागू करने के लिए प्रेरित किया। इसी मॉडल ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में, छत्तीसगढ़ को, भारत में पहली रैंक दिलाया।


यह दुनिया की सबसे बड़ी विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट-प्रबंधन उपक्रमण है और भारत की सबसे बड़ी SHG-चालित गतिविधि है, जिससे 9000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। यह मॉडल वित्तीय रूप से भी लाभकारी था। मेरे मॉडल ने जो किया उसे हासिल करने के लिए 164 स्थानीय शहरी निकाय के लिए लगभग 250 करोड़ की जरूरत पड़ती, लेकिन हमने ऐसा सिर्फ 222 करोड़ में किया।


बिलासपुर एक शहर के रूप में, ठोस नीतियों और प्रशासनिक कार्यों के प्रभावी ढंग से सही स्तर पर लागू किये जाने के साथ, कार्य के दूसरे चरण में आ चुका है। 14 वर्षों के अपने बिलासपुर में शहर प्रशासन के कार्यकाल में मैंने शहर को अपशिष्ट-प्रबंधन के अगले स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।


घरेलू स्तर पर पृथक्करण पहला कदम है और सामान्य शहर-स्तरीय कचरा प्रबंधन प्रक्रिया में ये भी शामिल होंगे :

• घरेलू अपशिष्ट उत्पादन और भंडारण

• सामुदायिक डिब्बे में कचरे को डंप करना

• अपशिष्ट निपटान स्थल की ओर परिवहन

• डंप यार्ड में अपशिष्ट निपटान


कचरे का प्रसंस्करण, विकास के स्थायी संधारणीय तंत्र को बनाने की क्षमता रखता है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 31 मार्च 2015 तक कुल 249 मेगावाट बिजली पैदा करने वाली बायोमास परियोजनाएं हैं। 11 वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान पारिवारिक और बड़े बायो गैस प्लांट से छत्तीसगढ़ में 527.63 लाख क्यूबिक मीटर बायो-गैस का उत्पादन हुआ| स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लि. (SAIL), भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता कंपनी है, जो भिलाई टाउनशिप में उत्पन्न होने वाले नगरपालिका के ठोस कचरे से बिजली बनाने के लिए एक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करेगी। प्रसंस्करण संयंत्र पायरोलिसिस / बायोमेथेनेशन / आरडीएफ आधारित नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट तकनीक का उपयोग करेगा या कोई अन्य गैसीकरण तकनीक से 'अपशिष्ट से ऊर्जा’ बिजली उत्पादन करेगा। नगरपालिका द्वारा प्रतिदिन 400 टन ठोस अपशिष्ट से बिजली उत्पन्न की जाएगी।


रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल (RDF) की एक और बड़े पैमाने पर उपयोगिता भी है - सीमेंट उद्योग के लिए एक ईंधन विकल्प। भिलाई में प्रसंस्करण कारखानों की बड़ी मात्रा होने के साथ, यह इन प्रक्रियाओं को और अधिक आर्थिक रूप से संभव बनाने का एक अतिरिक्त कारक बन जाता है।


आज, एक सामाजिक विकास कार्य की छवि और जिम्मेदारी सिर्फ स्वच्छता अभियान तक न रहकर, बहुत विस्तृत हो गयी है। इसे ध्यान में रखते हुए, बिलासपुर, डोर-टू-डोर संग्रह की 100% दर प्राप्त कर ठोस-अपशिष्ट का परिवहन करने में सक्षम था| हमने शहर में सर्वेक्षण करने के लिए SHG को ज़िम्मेदारी दी| इस सर्वेक्षण के डेटा ने हमें पूरे शहर में अपशिष्ट संग्रह को सुव्यवस्थित करने के लिए एक वैज्ञानिक रेखांकन बनाने में मदद की। स्वच्छ मिशन के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में हमने 'छोटा भीम' को भी जोड़ा। बच्चे, परिवार में महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाले होते हैं, इसके नाते, उन्हें प्रेरित करने से परिवार को भी प्रेरणा मिलेगी। रायपुर और बिलासपुर को छोड़कर, उनके जनसंख्या घनत्व के कारण, राज्य के अन्य सभी क्षेत्रों में जहां इस मॉडल को लागू किया गया था, उन्हें राज्य द्वारा वित्त पोषित किया गया। भारत सरकार ने इसे देश में सबसे अच्छा स्वच्छ मॉडल माना है।


कोई भी नीति या सुशासन की प्रक्रिया तब तक लागू नहीं होती है जब तक कि वह स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में योगदान न करे। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रयासों को नगरपालिका की योजना के साथ-साथ हर घर का अभिन्न अंग बनने की आवश्यकता है। इस पहली बाधा को पार करने के साथ, पारिस्थितिकी तंत्र एक आर्थिक रूप से प्रगतिशील मॉडल के साथ पूर्ण हो जाता है जो राज्य राजकोष पर न केवल कम भार डालता है बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि इसके लागू होने की अवधि या कार्यावधि में कायम रहे| अलग से बनी हुई नीतियों या पहल का बहुत प्रभाव पड़ता है लेकिन आकर्षण खो जाता है। अच्छी नीतियों की शुरुआत मजबूत होती हैं और समय के साथ और बेहतर होती जाती हैं|

 



    2019-04-09 05:03:22



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